होम | राइटर्स & बुक | लेखकों का साक्षात्कार
मैं किसी बच्चे के लेखक के रूप में चित्रित निश्चित रूप से नहीं किया जाना चाहता
मैं सभी प्रकार के लेखन का आनंद लेता हूं मुझे नहीं लगता कि कोई मुझे एक विशेष विषय में डाल सकता है। कभी-कभी लोग मुझे एक बच्चों के लेखक के रूप में कहते हैं -पर मैं न केवल एक बच्चों के लेखक हूँ, मैं सामान्य या वयस्क पाठक के लिए कहानियां भी लिखता हूं यह सिर्फ यही है कि उनमें से कुछ युवा पाठक या बच्चों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। मुझे छोटी कहानियां, कविताएं, निबंध, लघु उपन्यासों को लिखना पसंद है- कुछ भी लंबे समय तक नहीं क्योंकि मैं इस मामले मे काफी आलसी हूं
भारतीय लेखक, तनुज सोलंकी के साथ साक्षात्कार
डोगा अस्त, डोगा कॉमिक्स की उन्मूलन श्रृंखला का अंतिम भाग है, 8 भागो के इस श्रृंखला की शुरुआत डोगा निर्मुलक के साथ हुई थी। जहां हमें डोगा के अतीत के बारे में अधिक जानकारी मिलती है, जहां वह झुग्गी बस्तियों में रहते थे। एक दिन वह अंशु नाम के एक युवा लड़के से मिलता हैं, जिसने इसलिये रोटी चोरी की थी क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे
डेन ब्राउन के साथ यह साक्षात्कार द दा विंची कोड पर केंद्रित है।
अगर आप लोगो को ये कहंे की प्राण कुमार शर्मा का निधन अगस्त, 05, 2014 को हो गया तो सिर्फ कुछ ही लोग ध्यान देंगे किंतु अगर उन्हें ये कहे की चाचा चैधरी के निर्माता का निधन 7 अगस्त 2014 को 75 साल की उम्र में गुड़गांव मे हो गया है तो हजारो लोग शोक मे डूब जायेंगे। जब मैंने चाचा चैधरी के निर्माता की मृत्यु के बारे में पढ़ा, तो मुझे भी व्यक्तिगत रूप से दुख हुआ। वह कोलन कैंसर से पीड़ित थे।
कविता एक सामाजिक घटना है, यह हमारे आसपास की दुनिया के साथ जोड़ने का एक जरिया हैः अभय कुमार
जैसे-जैसे भारतीय कॉमिक उद्योग समय के साथ विकसित हो रहा है, उतना अधिक प्रकाशक इस बाजार में मुनाफे के हिस्से को हथियाने के कोशीश कर रहे हैैं। 90 के दशकों में काॅमिक्स के फलते फूलते बाजार देखने के बाद कई काॅमिक कंपनीयो ने कोशीश की किंतु वो उसमे नाकाम रही और मनोज और तुलसी जैसी कंपनी बंद होने की कगार पर पहंुच गयी जबकि राज काॅमिक डिजीटल को गले लगाने के कोशीश मे अपनी गुणवत्ता खो बैठा और बाजार मे उसकी साख गिरने लगी ।
- Advertisement -
 

ट्रेंडिंग

’आजादी के बाद का प्रेमचंद’-फणीश्वर नाथ ’रेणु’

’आजादी के बाद का प्रेमचंद’-फणीश्वर नाथ ’रेणु’

फणीश्वर नाथ ’रेणु’ हिंदी साहित्य के प्रेमचंद काल के बाद के क्रांतिकारी उपन्यासकार थे। वह समकालीन ग्रामीण भारत की आवाज और अग्रदूतों के बीच मुख्यधारा की हिंदी साहित्य में क्षेत्रीय आवाज लाने वाले लेखक थें। उनका जन्म 4 मार्च 1921 को पूर्णिया जिले के औरही हिंगना में हुआ था। उन्होंने अररिया और फॉरबिसगंज में अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की।...