काॅमिक्स जीनियसः राम वाएरकर

काॅमिक्स जीनियसः राम वाएरकर

राम वाएरकर ने भारतीय कॉमिक बुक संग्रह 'अमर चित्र कथा' के लिए एक कार्टून कलाकार के रूप में काम किया है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं, इतिहास, लोककथाओं और संस्कृति की कहानियों की एक श्रृंखला है। वेरकर ने पहली बार 12 वर्ष की उम्र के रूप में अपना पहला चित्र बनाया, जो एक कैलेंडर के लिए था। उन्होंने बाद में बच्चों की पत्रिका 'किशोर' और 1967 में 'अमर चित्र कथा' मे काम किया। किंतु अनंत पै के साथ जुड़ने से पहले वो टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए राजनीतिक कार्टून बनाते थे। अमर चित्र कथा मे काम करते हुये आगे चलकर वो दिलीप कदम, सौरेन रॉय, चंद्रकांत डी राणे, जेफ्री फोवलर और प्रताप मुलिक जैसे कलाकारो के साथ भी काम किया।

उन्होने जिस काॅमिक्स का सबसे पहले चित्रण किया उसमे 'कृष्ण' और 'जराथुश्रा', 'बटल ऑफ विट्स', 'गोपाल और द फेयर' और कई 'बीरबल की कहानियां' शामिल थी। 'कृष्ण' को 1969 में अंग्रेजी और हिंदी में रिलीज किया गया था जो की बेस्टसेलर की गिनती मे शामिल हुई। 1980 तक वह पाई द्वारा संपादित एक मासिक बच्चों की पत्रिका, टिंकल कॉमिक्स के साथ भी जुड़े रहे। वाएरकर ने कई काॅमिक्स चरित्र जैसे 'सुपरपंडी', 'नसरुद्दीन होजा', 'प्यारेला' का चित्रण किया साथ ही उन्होने पाठकों द्वारा लिखी गयी कई कहानियां के लिए भी चित्र बनाये जिसे 'रीडर्स चॉइस' सेक्शन में छापा गया। राम वएरकर 2003 मे उनकी मृत्यु हो गयी किंतु वो आखरी समय तक चित्र बनाते रहे। उनकी अंतिम कॉमिक्स 'विश्वामित्र' और 'चाणक्य' थीं। उनकी बेटी अर्चना अंबरकर ने उनकी मृत्यु के बाद उनकी रचना 'सुपरपंडी के रोमांच' जारी रखा।