मध्य 40 के दशक के स्कूल के बच्चों के लिए, निडर नादिया का मतलब साहस, ताकत, आदर्शवाद था

मध्य 40 के दशक के स्कूल के बच्चों के लिए, निडर नादिया का मतलब साहस, ताकत, आदर्शवाद था

हवा मे ’हे-य्याय’ की आवाज गुंजती है और घोड़े पर सवार एक नकाबपोश औरत जिसके एक हाथ मे हंटर है और दूसरे हाथ से उसने घोड़े की लगाम को पकड़े हुये है और जिसे देख बूरे लोग भागने लगते है- फियरलेस नादिया का ये रूप उस दशक के लोगो के लिए यादगार पल थे।

1930 और 1940 के दशक के दौरान सबसे बड़ी फिल्म सितारों में से एक, नादिया को अपनी हंसमुख भूमिकाओं के लिए जाना जाता था उन्हे लोग महिला रोबिन हूड भी कहते थे क्योंकि वो अपने साहसी स्टंट के साथ सभी खलनायकों से अकेले लड़ती थी। नाडिया की लोकप्रियता और साहसी व्यक्तित्व के पीछे एक अविश्वसनीय कहानी है कि कैसे एक नीली आंखों, गोरे रंग वाली सर्कस कलाकार भारतीय सिनेमा की पहली स्टंट अभिनेत्री और नारीवादी आइकन में से एक बन गयी।

तो नदिया के नाम से जाने वाली महिला कौन थी? वह मैरी इवांस के रूप में 1910 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में पैदा हुयी थी उसके पिता स्कॉटलैंड के थे जबकि मां ग्रीक से थी। जब वो चार साल की थी तभी उनका परिवार भारत आ गया क्योंकि उसके पिता जो की ब्रिटिश सेना में एक सिपाही के थे और उन्होने प्रथमविश्व युद्ध मे हिस्सा भी लिया था।

युद्ध में उसके पिता की मौत के कुछ सालों बाद, इवांस और उसकी मां पेशावर में चली गई, जहां उन्होंने घोड़े-सवारी सिखीं। ’’मैं सभी स्टंट तस्वीरों को प्यार करती थीं और अपने आप से कहती थी कि मैं चाहती हूं कि मैं एक दिन ऐसा कर सकूं,’’ इवांस ने ये बाते एक दुर्लभ वीडियो साक्षात्कार में कही थी। 1926 में एक बेटे के साथ मुंबई लौटकर, वह सर्कस, थियेटर में काम करने लगी नृत्य सिखने के लिये उन्होने मैडम एस्ट्रोवा नामक एक रूसी नृत्य शिक्षक से नृत्य का प्रशिक्षण लिया। उसी वक्त एक अर्मेनियाई भाग्य-बताने वाले ने उन्हे नादिया नाम दिया।

मध्य 40 के दशक के स्कूल के बच्चों के लिए, निडर नादिया का मतलब साहस, ताकत, आदर्शवाद था

वाडिया भाइयों, जमशेद और होमी, फिल्म निर्माता और वाडिया मूवीटोन प्रोडक्शंस के संस्थापकों के सहयोग से इवांस को सिनेमाई ख्याति मिली। लाहौर के एक थिएटर जमशेद से उन्होने शुरुआत की थी। जब नादिया ने जमशेद को थियेटर में अपनी पृष्ठभूमि के बारे में बताया, उन्होंने टिप्पणी की कि उन्होंने कभी उनके बारे में नहीं सुना। तब नादिया ने कहा तुरंत जवाब दिया की उन्होने भी उनके बारे मे कहीं नही सुना और ये जवाब सुनते ही उसने उन्हे काम पर रख लिया।

उनके विषय मे लेखक गिरीश कर्नाड ने कहा है की मध्य 40 के दशक के स्कूल के बच्चों के लिए, निडर नादिया का मतलब साहस, ताकत, आदर्शवाद था। छोटी- छोटी भूमिकाएं निभाते समय, नादिया को मौका मुख्य किरदार निभाने का मौका मिला 1935 में ’हंटरवाली’ फिल्म में । जो उनके भविष्य के पति होमी वाडिया द्वारा निर्देशित थी। नादिया ने नकाबपोश, कोड़े चलानेवाली राजकुमारी माधुरी की भूमिका निभाई। और उस फिल्म मे उन्हें बहादुर भारतीय लड़की के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो अपने पिता के राज्य में न्याय के लिए लड़ रही होती है

’हंटरवाली’ की सफलता के बाद होमी वाडिया ने हॉलीवुड से प्रेरित पांच और फिल्मों जैसे कि ’पहाड़ी कन्या’, ’मिस फ्रंटियर मेल’, ’डायमंड क्वीन’, ’पंजाब मेल’ और ’लूतरू लालना’ से निर्देशित किया। इनमें से कई फिल्मों में फंतासी और एक्शन थ्रिलर थे, जिसमें नादिया ने एक महिला रॉबिन हुड की भूमिका निभाई थी, जो अन्याय से लड़ती है और उन लोगों की मदद करती है जो बूरे लोगो द्वारा सताये गये थे। और उसके साथी है घोड़े ’पंजाब का बेटा’, उनकी कार रोल रॉयस और उनका कुत्ता गुनबोट।

नादिया ने 1950 के दशक तक फिल्मों मे अभिनय करना जारी रखा और 1968 में उनकी आखरी फिल्म खिलाडी में 58 वर्ष की आयु में अभिनय किया। 1961 में, उन्होंने होमी वाडिया से शादी की। होमी की मां, एक कट्टर पारसी ने अपने बेटे से एक विदेशी से शादी करने से इनकार कर दिया था,। और नादिया को इस अस्वीकृति या अस्वीकृति से चोट लगी थी। लेकिन आखिरकार, उसकी मां की मृत्यु के बाद उसने होमी से शादी की, लेकिन तब तक नादिया अपने शुरुआती अर्धशतक में थी। 1996 में मुंबई में 88 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई थी, उनके पति होमी का निधन हो जाने के आठ साल पहले।