पेटा के दबाव के बाद सिंथेटिक और नायलॉन युक्त मांजा प्रतिबंधित

राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंतर कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने नायलॉन मांजे जिसे चीनी मंजा के रूप में भी जाना जाता है के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के अंतिम आदेश को मंजूरी दे दी है। उनका कहना है की मांजे मे कपास का धागा शामिल ना होने तथा उस धागे पर शाीशे तथा अन्य नुकसान करने वाले लेप की परत के कारण ये इंसानो तथा पक्षियो के लिये जानलेवा है। इसलिए पेटा पक्षियों और मनुष्यों के सभी प्रकार के मांजे से रक्षा करने के लिए अपना काम जारी रखेगा।

पेटा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता श्री संजय हेगड़े ने किया था। उन्होने कई ऐसे दर्दनाक घटनाये रखी जिसमे चेन्नई मे मार्च 2017 मे एक बाईक सवार की मृत्यु मांजे से गला कटने की वजह से हुआ था तथा 15 अगस्त 2016 को दिल्ली मे एक बच्चे सहित तीन लोग मारे गये थे। इतना ही नही माजंें की वजह से हजारो पक्षियों हर साल मारे जाते है। क्योंकि मांजे पेड़ मे या तारो मे फंसे रहते है जिसकी वजह से पक्षियो की दर्दनाक मौत हो जाती है। सिर्फ दिल्ली मे ही 2016 मे 200 पक्षियो का इलाज किया गया था़। अहमदाबाद में एक पक्षी बचावकर्ता का अनुमान है कि कबूतरों और लुप्तप्राय प्रजातियों सहित 2,000 पक्षी - हर साल घायल होते हैं। शहर के उत्तरायण उत्सव मे 500 अपनी चोटों से मर जाते हैं। अनुमान के मुताबिक, 2015 में हैदराबाद में मकर संक्रांति मे मांजे की वजह से 300 से अधिक पक्षी घायल हो गए और 100 से ज्यादा लोग मरे।

पेटा ने अगस्त 2016 में एनजीटी में एक याचिका दायर की थी, और दिसंबर में, एनजीटी ने उत्पादन, बिक्री, खरीद और आयात के सभी प्रकार के आयात पर अंतरिम प्रतिबंध जारी किया और कहा की पतंग उड़ाने के लिये सिर्फ सादे कपास का इस्तेमाल करे। हालांकि, 6 जुलाई 2017 को, एनजीटी ने अपने पहले अंतरिम आदेश को प्रतिबंध से हटाकर कपास के कांच के साथ लेपित सूती धागे के उपयोग करने का आदेश दे दिया सिर्फ इस शर्त के साथ की कांच के साथ कोई और हानिकारक पदार्थ उसमे इस्तेमाल नही होगा। पेटा ने फिर से एकजीटी को इसपर विचार करने को कहा क्योंकि शीशे भी इंसानो और खासकर पक्षीयो के लिये हानिकारक है और शीशा पर्यावारण के लिये भी नुकसानदेय है क्योंकि इसे हम भले कह जमीन मे दबा देते है किंतु ये कभी नष्ट नही होता उसे खत्म होने मे करीब दस लाख साल लगते है। पेटा के इस कोशीश के बाद दिल्ली सरकार ने जनवरी 2017 से सभी शीशे वाले मांजे पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगा दिया।