क्यों भारत के बेघर बच्चे व्यस्त ट्रेन ट्रैक के किनारे रहने का चुनाव कर रहे हैं।

क्यों भारत के बेघर बच्चे व्यस्त ट्रेन ट्रैक के किनारे रहने का चुनाव कर रहे हैं।

हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आई है, किंतु फिर भी ये कड़वी सच्चाई है की आज भी पूरी दुनिया मे सबसे ज्यादा गरीब लोग भारत मे है। और उससे भी कहीं ज्यादा बड़ी बात ये है की उसमे अनाथ और घर से भागे बच्चो की सख्यां कही ज्यादा है। हावड़ा रेलवे स्टेशन पर गति और शोर का धुंध है, एक दिन में करीब 900,000 यात्री या उससे भी ज्यादा लोग सफर करते है और ठीक उसी स्टेशन पर चाय और खाने पीने के समान बेचने वाले भी मौजूद है जिनमे ज्यादातर की उम्र 18 से कम है कुछ तो मात्र 8 से 10 साल के है। और सवाल है की ये बच्चे कौन है? कहां से आते है। ज्यादातर लोगो का कहना है की इनमे से कई वो बच्चे भी है जो घरो से भागकर आये है क्योंकि उन्हे अपनो द्वारा ही पीटा जाता था या फिर उनके साथ यौन दुर्वव्यहार किया गया था। किंतु घर से भागने के बाद उनकी जिंदगी और भी नर्क हो गयी है वो गलत हाथो मे पड़ जाते है और फिर उन्हे या तो अपराध करने के लिये या वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है।

क्यों भारत के बेघर बच्चे व्यस्त ट्रेन ट्रैक के किनारे रहने का चुनाव कर रहे हैं।

वे बेहतर भविष्य की तलाश मे शहरों मे आने के लिये वो पहले ट्रेन पकड़ते हैं, शौचालय में छुप जाते हैं, जैसा कि वे फिल्मों में देखते हैं, उनकी आंखो मे आशा और भ्रम जाल जान बुना हुआ रहता है। लेकिन वे ज्यादातर सड़कों पर खत्म होते हैं, समाज के किनारों पर नशे की लत और हाशिए पर जीवन व्यतीत करते हैं। इन बच्चों में से कई टोल्यूनि आधारित गोंद और सॉल्वैंट्स के आदी हो जाते हैं, जो उन अस्थिर विषाक्त पदार्थों से मादक होते हैं जो उन्हें मादक करते हैं। उन्हे पाने के लिए उन्हे केवल कुछ रुपये खर्च करना पड़ता है और वो नशा उन्हें ठंड और भूख से उबरने में मदद करता है, उन्हें कठिन वास्तविकता से दूर कर देता है उन्हे कभी खुद ही नही सोते जब तक की वो नशा ना कर ले उन्हे नींद नही आती है। गिरोह उनका परिवार बन जाता है, उनका एकमात्र संदर्भ, एक छोटे से समुदाय अपने नियम और पदानुक्रम के साथ चलना होता है। बीमारियों और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की वजह से वो छोटी उम्र मे ही मर जाते है

अभी के सर्वे से ये पता चला है की सिर्फ कोलकता मे 56000 से ज्यादा बेघर बच्चे है जिनमे कुछ तो 6 से 10 साल के उम्र के है। अभी हाल मे ही सरकार ने इन बेघर बच्चो के लिये आधार कार्ड बनवाने की मुहिम चलायी है ताकि उन बच्चो को एक पहचान मिल सके साथ ही उन्हे सरकारी स्कूलो और अस्पतालो का लाभ भी उठा सके।