अमृतलाल नागर जन्मशतवार्षिकी समारोह संपन्न

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी नाट्य प्रदर्शन चित्र एंव पुस्कत प्रदर्शनी

अमृतलाल नागर जन्मशतवार्षिकी समारोह संपन्न
संस्कृति मंत्रालय भारत-सरकार एंव साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के संयुक्त तत्त्वाधान में हिंदी संस्थान लखनऊ के निराला सभागार में आयेजित अमृतलाल नागर जन्मशतवार्षिकी समारोह के पहले दिन 20 अगस्त 2016 को बीज व्यक्तित्व देते हुये प्रो0 सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा की नागर जी अकेले बहुविध साहित्यकार थे। उनका व्यक्तित्व एंव लेखन दोनो ही विपुलताओं से भरे थे। प्रो0 दीक्षित ने अनेक अवसरो पर नागर जी के साथ गुजारे वक्त के अनेक संस्मरण भी सुनाये।
नागर जी की सुपुत्री  अचला नागर ने उनके व्यक्तित्व तथा लेखन के विभन्न पक्षों को लेकर चर्चा की।

नागर जी की सुपुत्री अचला नागर ने उनके व्यक्तित्व तथा लेखन के विभन्न पक्षों को लेकर चर्चा की।

इस विशेष अवसर पर अमृतलाल नागर पर साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित हिंदी विनीबंध का गुजराती तमिल मलयालम भाषा मे अनूदित विनीबंध का लोकार्पण हुआ। साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त नागर जी के उपन्यास ’अमृत और विष’ का मराठी अनुवाद का लोकापर्ण भी किया गया। कार्यक्रम के संचालक कुमार अनुपम ने बताया की शीघ्र ही शेष भारतीय भाषाओं मे हो रहे अनुवाद भी पुस्तकाकार में प्रकाशीत होंगे।

 

अमृतलाल नागर की औपन्यासिक कृतियां विषय पर केंद्रित प्रथम सत्र में प्रख्यात कथाकार ममता कालिया ने कहा की नागर जी ने हिंदी गद्य को अभिव्यक्ति के सर्वाधिक सशक्त माध्यम के रूप मे स्थापित किया। उनका मानवतावाद बेहद उदार था।

 
शाम को नागर जी की रचना ’युगावतार’ का नाट्य मंचन भी ललित सिंह पोखरीया के निर्देशन में आयोजित हअुा। यह नाठक हिंदी लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र के जीवन पर आधारित है।

शाम को नागर जी की रचना ’युगावतार’ का नाट्य मंचन भी ललित सिंह पोखरीया के निर्देशन में आयोजित हअुा। यह नाठक हिंदी लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र के जीवन पर आधारित है।

 
शाम को नागर जी के कहानीयो पर आधारित ’नागर कथा’ नामक नाटक का चित्रा मोहन के निर्देश्न में मंचन संपन्न हुआ।

शाम को नागर जी के कहानीयो पर आधारित ’नागर कथा’ नामक नाटक का चित्रा मोहन के निर्देश्न में मंचन संपन्न हुआ। इस नाटक मे नागर जी की दो कहानियों- ’शकीला की मां’ और कादिर मियां की भौजी’ का कोलाज प्रस्तुत किया गया। नाटक में लखनउ की तत्कालीन नवाबी परंपरा के अंतिम दिनो और स्त्री की विकट जीवनदशा की मार्मिक झलक दिखी जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।

 
दोनो ही दिन लखनऊ के अनेक गणमान्य नागरिक लेखक संस्कृतिकर्मी छात्र और मीडियाकर्मी भारी संख्या में उपस्थित रहे।

दोनो ही दिन लखनऊ के अनेक गणमान्य नागरिक लेखक संस्कृतिकर्मी छात्र और मीडियाकर्मी भारी संख्या में उपस्थित रहे।