यदि आपका इरादा अच्छा है, तो भगवान आपके धनदाता बन जाते हैंः आबादी सुरती

यदि आपका इरादा अच्छा है, तो भगवान आपके धनदाता बन जाते हैंः आबादी सुरती

5 मई 1935 में पैदा हुए आबिद सुरती या अबीद सुरती एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भारतीय लेखक हैं जिन्होंने भारत और विदेशों में चित्रकार, लेखक, कार्टूनिस्ट, पत्रकार, पर्यावरणवादी, नाटककार और पटकथा लेखक के अलावा एक गैर सरकारी संगठन ड्रॉप डेड फाउंडेशन में व्यक्तिगत रूप मे कार्य कर रहे हैै। पानी की हर बूंद को बचाने के लिए छपी एक किताब के लिये उन्हे 1993 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था। वो बीते कुछ साल से लोगो के घरो मे टपकते नल और पाइपलाईन निशुल्क ठीक करते है।

सुरती बताते हैं कि उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता और अधिकांश बचपन फुटपाथ पर गुजरा. बीबीसी के साथ फेसबुक लाइव में सुरती बताते हैं कि विभाजन के समय उनका आधा कुनबा पाकिस्तान चला गया था और उनकी माँ की जिद के कारण आधा कुनबा हिंदुस्तान में रुक गया. उन्होंने बताया, हम सभी लोग एक खोली में रहते थे. फुटपाथ पर सोते थे. हमारी परवरिश करीब-करीब फुटपाथ पर ही हुई. सुरती के कार्टूनों की तरफ रुझान बढ़ने की घटना भी कुछ कम मजेदार नहीं थी

यदि आपका इरादा अच्छा है, तो भगवान आपके धनदाता बन जाते हैंः आबादी सुरती

सुरती ने बताया, परिवार बहुत गरीबी में था. माँ दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा करती थी और हम बच्चे लोग भीख मांगने जाया करते थे. मैं तब सात-आठ साल का रहा हूँगा. उन्होंने कहा, तब दूसरे विश्व युद्ध के फौजी मुंबई के डॉक इलाके में उतरा करते थे और फिर एक छोटी गाड़ी उन्हें छत्रपति शिवाजी टर्मिनल स्टेशन तक ले जाती थी. हम उस ट्रेन के पीछे-पीछे भागा करते थे.

यदि आपका इरादा अच्छा है, तो भगवान आपके धनदाता बन जाते हैंः आबादी सुरती

सुरती ने लघु कथाएँ, उपन्यास, नाटक, बच्चों की किताबें और यात्राएं लिखी हैं। उनकी कई पुस्तकों का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में किया गया है। वह 40 से अधिक वर्षों के लिए हिंदी और गुजराती अखबारों और पत्रिकाओं के लिए भी लिख रहे हैं और 1993 में उनकी लघु कथा संग्रह तीसरी आंख के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। वह एक घटना की वजह से लेखक बन गये जब परिवार के दबाव की वजह से उसका पहला प्यार टूट गया, तो किशोरावस्था में उन्होने अपनी कहानी पेपर मे देना शुरू कर दिया। यह कहानी गुजराती में 1 9 65 में टूटेला फारिस्ट के रूप में प्रकाशित हुई थी और उस अप्रत्याशित सफलता मिली।