नारायण देबनाथः बंगाल के प्रसिद्ध काॅमिक्स चरित्र 'बतुल द ग्रेट' के रचयिता

नारायण देबनाथः बंगाल के प्रसिद्ध काॅमिक्स चरित्र 'बतुल द ग्रेट' के रचयिता

नारायण देबनाथ भारत के एक वरिष्ठ कॉमिक्स कलाकार हैं, जिनके पात्रों, विशेषकर हांडा-भोंडा, बंटुल- महान और नॉनटे-फाँटे ने पश्चिम बंगाल और बाहर में उनकी विशाल लोकप्रियता में उम्र और पीढ़ी को पार कर लिया है। देबनाथ बाबू भारत के पहले और एकमात्र कॉमिक्स-कलाकार हैं जिन्होंने डॉक्टर ऑफ लिटरेचर डिग्री प्राप्त की है। उनके चित्र और कॉमिक्स कई अखबारों, किताबों और पत्रिकाओं, विशेष रूप से शुक्तरा, किशोर भारती आदि पर दिखाई देते हैं।

नारायण देबनाथ बंगाली कॉमिक्स के पिता के रूप में जाने जाते है, उनके बनाये कॉमिक कृतियों अपनी हरकतो से तथा कभी-कभी कभी मूर्खतापूर्ण मजाक से बच्चो को हंसाया तथा गुदगुदाया है। 1962 से शुक्तरा में 'हांड भोंडा' और 1965 में 'बतुल द ग्रेट' निर्माण किया। 1969 से किशोर भारती में 'नॉनटे फोटेज' का शुभारंभ किया गया।

उनकी अन्य कार्टून चरित्रो मे रबी चोबी भी है जिसे मई 1961 में आनंदममेल नामक साप्ताहिक पत्रिका के अंक में रबींद्रनाथ टैगोर के जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य मे जश्न मनाने के लिए प्रकाशित की गयी थी। किंतु पहली बार 50-पृष्ठो की कॉमिक्स सर्वोदय साहित्य प्रकाशन, वाराणसी के पुस्तक प्रारूप में प्रकाशित किये गये थे।

नारायण देबनाथ ने जब पहला कॉमिक चरित्र का निर्माण किया था तथा सबसे पहले कॉमिक स्ट्रिप तथा किताब छपा था वो था 'बतुल द ग्रेट'। सुपरहीरो का विचार उनके दिमाग मे तब आयी थी जब वो कॉलेज स्ट्रीट, कलकत्ता से लौट रहे थे उन्होंने बाद मे ये बताया भी था की बतुल का चरित्र उनके दोस्त मनोहर एच से प्रभावित था, जो प्रसिद्ध बंगाली बॉडी बिल्डर था। शुरू में उन्होने बतुल को कोई शक्तियां नही दी थी किंतु जब बांग्लादेश मुक्ति के लिए युद्ध हुआ था जिसे 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध भी कहा जाता है के दौरान देबनाथ को लोगो ने सुझाव दिया था की वो अपने हीरो को सुपरहीरो बनाये जिससे कोई भी ना जीत पाये। और तब उसके बाद बतुल को सुपर हीरो बनाया गया ऐसा हीरो जिससे बुलेट भी टकरा कर उछलने लगती थी बिल्कुल सुपरमैन की तरह।