कुलधरा गाँवः ब्राह्मणों द्वारा शापित और त्यागा हुआ

कुलधरा गाँवः ब्राह्मणों द्वारा शापित और त्यागा हुआ

कुलधरा गाँव ब्राह्मणों के क्रोध का प्रतीक- जहां आज भी लोग जाने से डरते हैं। राजस्थान के जैसलमेर शहर से 18 किमी दूर स्थित कुलधरा गाव आज से 500 साल पहले 600 घरो और 85 गावो का पालीवाल ब्राह्मणों का साम्राज्य ऐसा राज्य था जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। गाँव का निर्माण १३वीं शताब्दी में था लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से १९वीं शताब्दी में गाँव का पतन यानी विनाश हो गया था ये बात सभी जानते है रेगिस्तान के बंजर जमीन में पानी नहीं मिलता किंतुू वहां पालीवाल ब्राह्मणों ने ऐसा चमत्कार किया जो इंसानी दिमाग से बहुत परे थी, उन्होंने जमीन पर उपलब्ध पानी का प्रयोग नहीं किया। न बारिश के पानी को संग्रहित किया बल्कि रेगिस्तान के मिट्टी में मौजूद पानी के कण को खोजा और अपना गांव जिप्सम की सतह के ऊपर बनाया,उन्होंने उस समय जिप्सम की जमीन खोजी ताकि बारिश का पानी जमीन सोखे नहीं, और आवाज के लिए गांव ऐसा बसाया की दूर से अगर दुश्मन आये तो उसकी आवाज उससे 4 गुना पहले गांव के भीतर आ जाती थी. हर घर के बीच में आवाज का ऐसा मेल था जैसे आज के समय में टेलीफोन होते है।

पालीवाल समुदाय आमतौर पर खेती और मवेशी पालने पर निर्भर रहता था । और बड़ी शान से जीता था। जिप्सआम की परत बारिश के पानी को जमीन में अवशोषित होने से रोकती और इसी पानी से पालीवाल खेती करते । और ऐसी वैसी नहीं बल्कि अणिक मात्रा में फसल पैदा करते। जैसलमेर के दीवान और राजा को ये बात हजम नहीं हुई की ब्राह्मण इतने आधुनिक तरीके से खेती करके अपना जीवन यापन कर सकते है तो उन्होंने खेती पर कर लगा दिया पर पालीवाल ब्रह्मिनो ने कर देने से मना कर दिया। उन्होने गांववालो को समझाने के लिये अपने दीवान सलीम सिंह को गांव के मुखिया के पास भेजा जहां पर उसे मुखिया की बेटी पसंद आ गयी और वो सब भूल कर उसने मुखिया से उससे शादी करवाने की बात की जिसे मुखिया ने मना कर दिया ये देख सलीम सिंह गुस्से मे अपने पैर पटकते हुये उन्हे धमकी दी की अगर उन्होने उसे लड़की नही सौंपी तो वो पूरे गांव को आग के हवाले कर देगा।

ब्राह्मणों को अपने आत्मसम्मान से समझौता बिलकुल बर्दास्त नहीं था इसलिए रातो रात 85 गावो की एक महापंचयात बैठी और निर्णय हुआ की रातो रात कुलधरा खाली करके वो चले जायेंगे, रातो रात 85 गांव के ब्राह्मण कहा गए कैसे गए और कब गए इस चीज का पता आजतक नहीं लगा। पर जाते-जाते पालीवाल ब्राह्मण शाप दे गए की ये कुलधरा हमेशा वीरान रहेगा इस जमीन पर कोई फिर से आकर नहीं बस पायेगा। पालीवाल ब्राह्मणों के श्राप का असर यहां आज भी देखा जा सकता।

कुलधरा गाँवः ब्राह्मणों द्वारा शापित और त्यागा हुआ

 

आज भी जैसलमेर में जो तापमान रहता हे गर्मी हो या सर्दी,कुलधरा गाव में आते ही तापमान में 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो जाती है। वैज्ञानिको की टीम जब पहुंची तो उनके मशीनो में आवाज और तरगो की रिकॉर्डिंग हुई जिससे ये पता चलता है की कुलधरा में आज भी कुछ शक्तिंया मौजूद है जो इस गांव में किसी को रहने नहीं देती। मशीनो में रिकॉर्ड तरंग ये बताती है की वहा मौजूद शक्तिया कुछ संकेत देती है। आज भी कुलधरा गाव की सीमा में आते ही मोबाइल नेटवर्क और रेडियो काम करना बंद कर देते है और जैसे ही गांव की सीमा से बाहर आते है मोबाइल और रेडियो शुरू हो जाते है।

पूर्व में इस गाँव में घूमने जाने के लिए के अनुमति नहीं थी ,क्योंकि इस गाँव को भूतिया गाँव कहा जाता है लोगों के अनुसार यहां भूत रहते है। लेकिन अभी राजस्थान सरकार ने यह दावा किया है कि यहाँ कोई भूत नहीं रहते है इसलिए सभी के लिए खोल दिया है और पर्यटन स्थल का दर्जा दिया गया है। इस कारण अब यहां हजारों की संख्या में लोग घूमने आते है। यहाँ स्थानीय लोग ही नहीं अपितु देश एवं विदेश से भी आते है। पर्यटक यहां इस चाह में आते हैं कि उन्हें यहां दबा हुआ सोना मिल जाए। इतिहासकारों के मुताबिक पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी संपत्ति जिसमें भारी मात्रा में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात थे, उसे जमीन के अंदर दबा रखा था। यही वजह है कि जो कोई भी यहां आता है वह जगह-जगह खुदाई करने लग जाता है। इस उम्मीद से कि शायद वह सोना उनके हाथ लग जाए। यह गांव आज भी जगह-जगह से खुदा हुआ मिलता है। प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो सैलानी घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता हैं।