भारत का पहला रॉकेट और उपग्रह जिसे लाया गया था साइकिल और बैलगाड़ी पर

भारत का पहला रॉकेट और उपग्रह जिसे लाया गया था साइकिल और बैलगाड़ी पर

अगर कोई आपसे ये कहे की आज से 52 साल भारत के पहले राॅकेट को लांच करने के लिये लांचीग स्टेशन साईकिल से पहुंचाया गया था तो आपको चैंक जायेगें मानना मुश्किल होगा किंतु ये सच है सिर्फ यही नही उस राॅकेट से थोड़ा भारी दूसरे राॅकेट को बैलगाड़ी में ले जाया गया था।

यह 53 वर्ष पहले 21 नवंबर, तिनंवतपुरम के बाहरी इलाके मे एक छोटा सा राॅकेट उतारा गया और ये घोषणा की गयी थी की ये जगह भविष्य मे राॅकेट लांचीग के लिए जाना जायेगा और हकीकत मे बाद मे उस जगह नाम थंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्च स्टेशन (टीईआरएलएस) के रूप में जाना जाने लगा और बाद में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) बन गया।

भारत का पहला रॉकेट और उपग्रह जिसे लाया गया था साइकिल और बैलगाड़ी पर

1963 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने थुंबा इक्वेटोरियल लॉन्चिंग स्टेशन से अपना पहला रॉकेट लॉन्च किया। रॉकेट का वनज केवल कुछ किलो तथा आकार मे काफी था जिसे कोई भी इंसान आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकता था।

नारियल के बागानों के बीच स्टेशन के पास एक ही लॉन्च पैड था। एक स्थानीय कैथोलिक चर्च, सेंट मैरी मैगडेलेने के चर्च ने वैज्ञानिकों के लिए मुख्य कार्यालय के रूप में सेवा प्रदान की। बिशप के घर को एक कार्यशाला में बदल दिया गया था। एक पशु शेड प्रयोगशाला बन गया, जिसमें अब्दुल कलाम आजाद जैसे युवा भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे थे और रॉकेट को साइकिल के पीछे बने कैरीयर पर लादकर लाया गया था। दूसरा रॉकेट, जिसे कुछ समय बाद लॉन्च किया गया था, थोड़ा बड़ा और भारी था और इसे लाने के लिए एक बैलगाड़ी का प्रयोग किया गया था।