दादा साहेब फालकेः भारतीय सिनेमा के जनक

दादा साहेब फालकेः भारतीय सिनेमा के जनक

धुधींराज गोविंद फाल्के जिन्हे दादा साहेब फालके के रूप मे भी जाना जाता है, वो एक प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता थे और पटकथा लेखक। जिन्हे भारतीय सिनेमा का जनक भी कहा जाता है। छोटी उम्र से ही, वे कलात्मक थे। शुरूवात से ही प्रकृति और रचनात्मक कला की तरफ उनका झुकाव था। स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरा करने के बाद उन्होने कई नौकरीया की जिसमे फोटोग्राफर और ड्राफ्ट्समैन भी था। गोधरा में एक फोटोग्राफर के रूप में अपना कैरियर शुरू किया लेकिन उनकी पत्नी के निधन के बाद उसे छोड़ दिया। और बाद मे वे ड्राफ्ट्समैन बन गये। 1908 में फाल्के और उनके एक साथी ने फाल्के की कला मुद्रण और उत्कीर्णन वर्क्स की स्थापना की है, लेकिन वो जल्द ही बंद हो गया और इसका कारण था दोनो के बीच मतभेद होना। एक बार उन्हे मूक फिल्म ’द लाईफ आॅफ क्राईस्ट’ देखने का मौका मिल जो की वो फिल्म उनकेे कैरियर में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। फाल्के उस फिल्म की गहराई मे उतर गये और अब उनका सिर्फ एक ही मिशन था की भारत मे भी सिनेमा का पर्दापन हो। जिसे पूरा करने के लिये वे 1912 में लंदन गए ब्रिटिश अग्रणी फिल्म निर्माता सेसिल हेपवर्थ से उसे सिखने के लिये। 1913 में उन्होने भारत की पहली मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र, एक हिंदू पौराणिक कथाओं के आधारीत फिल्म बनाई। फिल्म, पटकथा से लेकर उसमे पैसा लगाना और उसे निर्देशीत करना सब उन्होने ही किया। राजा हरिश्चंद्र बहुत बड़ी सफल फिल्म साबित हुयी और भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी। 1913 मे उन्होने पहली बार भस्मासुर मोहिनी फिल्म मे एक महिला को लेकर आये क्योंकि इससे पहले कोई पुरूष ही महिला का किरदार करता था क्योंकि उस वक्त फिल्मो मे काम करना एक महिला के लिये वेश्या के काम से भी गंदा लगता था ।

दादा साहेब फालकेः भारतीय सिनेमा के जनक

 

उनकी पहली फिल्म की सफलता के बाद, उन्होने कई लघु फिल्में बना दिये। उनकी प्रसिद्ध में से कुछ थे काम करता है मोहीनी भस्मासुर(1913), सावित्री सत्यवान(1914), लंका दहन(1917), श्री कृष्ण जन्म (1918) और कालिया मर्दन (1919)। दादा साहेब ने 1885 शादी की लेकिन दुर्भाग्य से 1900 मे ही उनकी पहली पत्नि चल बसी फिर उन्होने सरस्वतीबाई से शादी की जिनसे उन्हे बच्चे भी हुये उनकी दूसरी पत्नि ने उनके पेशे मे पूरा साथ दिया।

16 फरवरी, 1944 को नासीक बंबई मे 73 वर्ष की उम्र में उन्होने अंतिम सांस ली

भारतीय सिनेमा में उनके जीवन भर योगदान के सम्मान में, दादा साहेब फालके पुरस्कार भारत सरकार द्वारा 1969 में स्थापित किया गया था। ये एक प्रतिष्ठित उच्चतम पुरस्कार है भारत में फिल्म हस्तियों के लिए उनके अच्छे अभिनय और फिल्मो को नई पहचान देने के लिये हर साल भारत के राष्ट्रपति द्वारा ये पुरस्कार दिया जाता है। ये आवार्ड कितना महत्वपुर्ण है ये इसी बात से पतस चलती है की 1969 से 2016 तक सिर्फ 48 अवार्ड ही दिये गये है 1969 मे सबसे पहला पुरस्कार देवीका रानी को मिला था और 2016 मे ये मनोज कुमार को मिला है।