भारत के सड़को के बुक बॉयज

मुझे पता है कि लोग इसे पाइरेट्स संस्करण कहते हैं। लेकिन मेरे लिए यह एक सम्मान है, और इस युवा बच्चे को पैसा बनाने के लिए एक ईमानदार तरीका है। ये कहना है विश्वप्रशिद्व लेखक पाउलो कोइल्हो जिन्होने ये प्रतिक्रिया तब दी जब उनके एक प्रशंसक ने दिल्ली से एक फोटो उन्हे भेजा जिसमे एक बच्चा अपने छोटे हाथो मे ढेर सारी नकली छपी किताब सड़को पर रेड लाईट के सामने बेच रहा था जिसमे उनकी किताब (पाउलो कोइल्हो) की भी थी।

भारत के सड़को के बुक बॉयज

 

मुंबई में हाजी अली यातायात चैराहे पर रोशनी लाल हो जाती है, रेलिंग को फांद कर कुछ लड़के तेजी से आते है उन्ही मे एक लड़का जिसकी उम्र 12 या 13 साल था तेजी से एक गाड़ी की तरफ दौड़ता है वो जानता है हरी बत्ती होने से पहले उसे कुछ न कुछ बेचना है वो एक कार के सामने जा खड़ा होता है और शीशे से बाहर झांकते एक महिला की तरफ देखते हुये अपनी हाथ मे थमी चार पांच किताबो को आगे करते हुये किताबो के नाम लेने लगता है। हांलाकि वो महिला जानती है वो जो बेच रहा है वो नकली किताब है यानि असली किताब की काॅपी किंतु समय काटने के लिए और सस्ते मे मिलने की वजह से वो थोड़ा दाम कम करा कर खरीद ले लेती है। बत्ती हरी होती है और कार आगे बढ़ जाती है और वो बच्चा तेजी से वापस अपने दोस्तो के पास चला जाता है और हंसी मजाक मे जुट जाता है।

शहरो में सड़कों पर हजारों बच्चे रहते हैं, लेकिन केवल कुछ ही बच्चे ही किताबें बेचते हैं। ये बच्चेे अपने परिवार के साथ रहते हैं और अपना घर कहने के लिए एक जगह है, भले ही वह फुटपाथ पर हो और बांस के खंभे से ढंका हो और गंदगी हो। ऐसे बच्चों पर पुस्तक विक्रता ज्यादा भरोसा करते है बजाये उनके जो एक गिरोह मे रहते है तथा जिनके माता पिता नही होते या उनकी नही सुनते। वो जानते है की माता पिता की देख रेख वाले बच्चे उन्हे किताब बेच कर सही वक्त पर पैसे दे देगें।

एक ट्विटर पोस्ट में, द अल्केमिस्ट, ग्यारह मिनट और जहीर सहित कई बेस्ट-बिकने वाले उपन्यासों के ब्राजील के लेखक ने ट्वीट किया, कुछ लोग इस किताबो की चोरी करना कहते हैं मैं इसे किसी भी लेखक के लिए एक पदक कहता हुं क्योंकि उनके लिये ये एक पकद के समान है क्योंकि आखिर उन बच्चो की वजह से ही कोई आपका किताब पढ़ रहा है। ये प्रतिक्रिया तब दी जब उनके एक प्रशंसक ने दिल्ली से एक फोटो उन्हे भेजा जिसमे एक बच्चा अपने छोटे हाथो मे ढेर सारी नकली छपी किताब सड़को पर रेड लाईट के सामने बेच रहा था जिसमे उनकी किताब (पाउलो कोइल्हो) की भी थी। कुछ ऐसा ही वक्या ट्विंकल खन्ना के साथ भी हुआ था जब उनकी गाड़ी लाल बत्ती के सामने रूकी थी और एक बच्चा उनके गाड़ी के सामने आकर उन्ही की लिखी किताब ’ंिमसेस फनीबाॅय और द लिजेंड आॅफ लक्ष्मी प्रसाद’ की नकली प्रतियां बेच रहा था

भारत के सड़को के बुक बॉयज

 

भारत में बाल मजदूरी और कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ कानून हैं, लेकिन दोनों खुले तौर पर उल्लिखित हैं। वास्तव में, पायरेटेड पुस्तकों की अधिकांश बिक्री, जो ट्रैफिक क्रॉसिंग और रेलवे प्लेटफॉर्म पर होती है, पुलिस के प्रत्यक्ष दृश्य में होती है। यातायात और रेलवे अधिकारी कहते हैं कि उनका काम बालमजदूरो को पकड़ना या उनका पीछा करना नही है ये उनके काम के अंदर नही आता। उन बच्चे को भी ये पता है की वो जो नकली किताब बेच रहे है वो गैरकानूनी है किंतु वो क्या कर सकते है पैसा कमाने के लिए वो इसे बुरा नही मानते।

इस अवैध पुस्तक व्यापार की सबसे दुखद विडंबना यह है कि उसका सर्वश्रेष्ठ सेल्समैन वे जो भी बेच रहे हैं उसका मूल्य पूरी तरह समझ नहीं पाएंगे। वे पुस्तक खिताब और सर्वश्रेष्ठ-विक्रय लेखकों के नामों को वे नही जानते । किंतु वे काम के लिए स्कूल छोड़ देते हैं, वे पढ़ नहीं सकते हैं, और पुस्तकों को बेचते हैं क्योंकि वे कुछ भी बेच चुके हैं। वे बच्चे इन्ही किताबो के साथ बड़े हुये है किंतु उन्होने उसे कभी पढा नही कभी उस सुख का आनंद नही लिया। और यही उनके लिये सबसे बड़ी त्रासदी है।