अमर चित्र कथा के रचयिता अंकल अनंत पई

अमर चित्र कथा के रचयिता अंकल अनंत पई

1967 में, सरकारी दूरदर्शन नेटवर्क पर एक टीवी क्विज शो देखने के दौरान, एक युवा पत्रकार को एहसास हुआ कि शो में भारतीय बच्चों ने ग्रीक पौराणिक कथाओं के बारे में पूछे गये प्रश्नो का जवाब आसानी से दे दिया किंतु वही जब उनसे भारत के महत्वपूर्ण महानतम काव्य रामायण के एक पात्र के बारे मे पूछा गया तो वो उसका जवाब नही दे पाये। ये देख वो निराश हो गये किंतु इससे उन्हे प्रेरणा मिली और फिर उन्होने खूबसूरत चित्रो और कहानीयों के जरीये भारत के महाकाव्य को अमर चित्र कथा काॅमिक्स के रूप मे बच्चो के सामने पेश किया। 1967 से प्रारंभ इन सुंदर चित्रों वाली किताबों ने भारत में तहलका मचा दिया था। शायद ही कोई भारतवासी हो जिसने अमर चित्र कथाएँ अपने जीवन में न पढ़ी हों। अमर चित्र कथा के नाम से उन्होंने सचित्र पुस्तकों के प्रकाशन का अभूतपूर्व काम किया।

अनंत पाई का जन्म 17 सितंबर, 1929 को हुआ था कर्नाटक के कार्कल शहर में जन्मे अनंत के माता पिता का देहांत तभी हो गया था, जब वो महज दो साल के थे । 12 साल की उम्र में उनके नाना ने उन्हें मुंबई में अच्छी शिक्षा के लिए ओरिएंट स्कूल माहिम भेज दिया. इसके बाद उन्होंने केमेस्ट्री में मुंबई विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी. 1961 में उनका विवाह 20 साल की ललिता के साथ हुआ। मुंबई विश्वविद्यालय से दो डिग्री लेने वाले पई का कॉमिक्स की तरफ रुझान शुरु से था लेकिन अमर चित्रकथा की कल्पना तब हुई, जब वो टाइम्स ऑफ इंडिया के कॉमिक डिवीजन से जुड़े।

अपने जीवन के प्रारंभ में ही उन्होंने बच्चों के लिये काॅमिक्स तथा पत्रिका निकालने का प्रयत्न किया किंतु असफल रहे। इसके बाद उन्होंने टाइम्स आफ इंडिया में नौकरी की जहाँ वे इंद्रजाल काॅमिक्स के प्रकाशन विभाग से जुड़े रहे। किंतु वो वहां की नौकरी से असंतुष्ट थे क्योंकि इंद्रजाल काॅमिक्स अमेरिकी किरदार जैसे फैंटम और मँडरेक को हिंदी मे रूपातंरित करके बेचते थे।

अमर चित्रकथा प्रकाशित करने के लिये उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी और इंडिया पब्लिशिंग हाउस के जी एल मीरचंदानी के साथ काम प्रारंभ किया। उस समय के प्रसिद्ध प्रकाशक एलाइट से लेकर जैको तक अधिकतर सभी ने उनके अमर चित्र कथा के आइडिया को नकार दिया। इसलिये उन्होंने लेखक संपादक और प्रकाशक का सारा काम स्वयं करने का निश्चय किया। 1969 में उन्होंने रंगरेखा फीचर्स की स्थापना की और 1980 में बच्चों की पत्रिका टिंकल ले कर आये। बाद में उन्होंने रामू और श्यामू, कपीश, छोटा राजी, रेखा, तथा बच्चों में सफलता के रहस्य से संबंधित अनेक पुस्तकें प्रकाशित की। उन्होंने एकम सत (ईश्वर की वैदिक अवधारणा) और सफलता के रहस्य नाम दो वीडियो फिल्मों का निर्माण भी किया। उन्होंने बच्चों और किशोरों के लिये व्यक्तित्व निर्माण की पुस्तकें भी लिखी हैं और अमर चित्रकथा के आडियो संस्करण निकाले हैं जिसमें कहानियों को स्वयं उनकी आवाज में कहा गया है। पई की 400 से ज्यादा टाइटल वाली प्रतियां प्रकाशित हुईं. 20 से ज्यादा भाषाओं में उनकी कृतियों का अनुवाद हुआ है. पूरी दुनिया में 9 करोड़ से ज्यादा प्रतियों की बिक्री हुई है. हांलाकि कभी कभी अनंत पई विवादो मे भी घिरे जैसे की एक बार 1976 मे छपी एक काॅमिक्स को लेकर वाल्मीकि समाज नाराज हो गया क्योंकि उस किताब मे रामायण को लिखने वाले वाल्मीकि को चोर बताया गया था। लोगो ने तो यहां तक कह दिया था की पई ब्राह्मणवादी पूर्वाग्रह से ग्रस्त है इसलिए अनंत पई ने टिंकल के अगले अंक मे लोगो के सवालो को जवाब छापा।

दिल का दौरा पड़ने से 24 फरवरी 2011 को शाम के 5 बजे अनंत पई का निधन हो गया । भारतीय काॅमिक्स के पिता कहे जाने वाले पई की कोई संतान नही थी किंतु उन्होने अपना पूरा जीवन बच्चो की किताबे लिखने मे बीता दिया। भारतीय कॉमिक्स को लोकप्रिय और उनके माध्यम से आम लोगो तक संदेश पहुँचाने वाली अमर चित्र कथा हमेशा यूँ ही अमर रहेंगी ठीक जैसे अंकल पई अमर हो गए है !